भवन खरीदते या बनवाते समय वास्तु
भवन खरीदते या बनवाते समय वास्तु
भवन खरीदते या बनवाते समय वास्तु अपने मकान में रहना लोगो की ख्वाहिश होती है। जीवन की एक बड़ी पूंजी एकत्रित करके भवन को ख़रीदा या बनाया जाता हैं ,ताकि उसमें सुकून से जीवन को गुजारा जाये। सुकून से जीवन तभी गुजरेंगा जब भवन में वास्तु दोष न हो
आइये जानते हैं कि भवन खरीदते या बनवाते समय किन बातों पैर विशेष ध्यान देना चाहिए।
१. दो विशाल भूखंड के मध्य छोटा संकरा भूखंड कभी भी उत्तम नहीं माना गया हैं।
२. भूखंड खरीदते समय यह ध्यान अवश्य दें कि भूखण्ड सूर्यभेदी या चन्द्रभेदी हैं।
३. प्राथमिक रूप से भवन निर्माण के लिए वर्गाकार या आयताकार भूमि का ही चयन करना चाहिए। विकृत भूमि चयन कदापि ना करें।
४. भवन में भारी वस्तुए हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही रखनी चाहिए। पूर्व व उत्तर में कदापि नहीं।
५. भवन के सामने किसी प्रकार का अवरोध जैसे -टीला ,बड़ा वृक्ष ,बिजली का खम्बा ,ट्रांसफार्मर आदि नहीं होना चाहिए।
६. भवन में सीध में दो दरवाजे नहीं रखने चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा घर में नहीं टिकती हैं।
७. भूखंड के सामने कोई धार्मिक स्थल नहीं होना चाहिए। मंदिर की छाया पड़ने पर वह भवन रहने के योग्य नहीं रहता हैं।
८. आपका भवन किसी रास्ते का आखिरी मकान नहीं होना चाहिए और न आने वाले रास्ते के ठीक सामने हो।
९. अध्ययनरत छात्र ,वृद्ध और आध्यात्मिक व्यक्तियों को पूर्व दिशा की ओर सिर रखकर सोना चाहिए।
१०. हैंडपंप या समर्सेबल घर के पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए।
११. भोजनालय कभी भी उत्तेर या ईशान कोण में नहीं बनवाना चाहिए। हमेसा आग्नेय कोण में ही भोजनालय होना चाहिए।
१२. बिना दरवाजों के ,बिना छत के घर के घर के गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से परिवार पैर संकट आते हैं।
१३. गृहप्रवेश कभी भी रविवार ,मंगलवार या शनिवार को कदापि न करें ,अन्यथा मुसीबत पीछा नहीं छोड़ती हैं।
१४. घर में उत्तर दिशा की दिवार पर झरने का चित्र नहीं लगाना चाहिए वरना धन की बर्बादी होती हैं।
१५. भवन की नाली उत्तर दिशा में ही होनी चाहिए यानि पानी का बहाव उत्तेर की ओर होना शुभ माना जाता हैं।
१६. भवन खरीदते या बनाते समय यह विचार जरूर करना चाहिए कि भवन शेर मुखी या गौमुखी। शेर मुखी मकान व्यापारिक संस्थान के लिए अच्छा होता हैं किन्तु गौमुखी निवास करने के लिए शुभ होता हैं।
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